"जिंदगी बन गई हो" तुमसे मुलाकात हुए कुछ समय ही हुआ है, मालूम नहीं क्या जादू किया तुमने, बिना कुछ कहे मेरी दिल की बातों को बखूबी जान लेती हो, मुझे समझने में जरा सावत भी नहीं लगाती हो, शायद इन्हीं टूटे कारण तुम "मेरी जिंदगी बन रही हो". प्यार पहले भी हुआ था, यह दिल पहले भी किसी और की बातों में मसरूफ हो जाया करता था, यह दिल पहले भी किसी और के लिए धड़का था, ना जाने तुम्हारे आने के बाद यह मासूम दिल "जो तुम्हें अपनी जिंदगी बना बैठा". अपने हर लमहे को यूं बयां कर देते थे,जैसे हम खुद को बया करते हैं, तुम्हारे सामने अपनी खुशी और गम को बखूबी बयां करते हैं, ना जाने ऐसा क्या किया तुमने जो "तुम्हारे सामने हम खुली किताब बन चुके हैं" शुरुआत तो एक हसीन दोस्ती से हुई थी, ना जाने कब यह दोस्ती प्यार में तब्दील हो रही, मालूम ना चला... अब आलम कुछ ऐसा है कि... "तुम जिंदगी बन रही हो" चलो बस बहुत हुआ अगर तुम पर किताब लिखी जाए तो,वो भी कम है, रो रो के लिए तुम बस एक लड़की हो.. "मेरे लिए तुम मेरी जिंदगी बन रही हो" -Akash Srivastava- A...
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